Thursday, 2 April 2015

वीर वर राठौड राजा रुघनाथ सिंह जी मारोठ

मेड़तिया रुघनाथरे, मुख पर बंकि मूँछ।
भागे हाथी शाहरा, करके ऊंची पूँछ ।।

आज वीर वर राठौड राजा रुघनाथ सिंह जी मारोठ की जयंती है। समारोह भी हमेशा की तरह पैतृक जन्म स्थान मारोठ (नावाँ) में मनाया जा रहा है ।

वंशावली व वंशज
-    राव जोधा जी-    राव दुदा जी -    राव विरमदेव जी-    राव जयमल जी-    गोयंददास जी-    सांवलदास जी-    रुघनाथ सिंह जी मारोठ-    किशोर सिंह देवली बड़ी -    जालिम सिंह जूसरी जिन्होंने कुचामन गढ़ की नीव रखी -    सुरतान सिंह कुचामन-    मालम सिंह कुचामन-    शिवदान सिंह धनकोली गढ़  
-    हुक्म सिंह धनकोली-    रामलाल सिंह जूसरी-    धने सिंह जूसरी-    लक्षमण सिंह जूसरी व इनके -    मोहन सिंह, जगदीश सिंह, केशव सिंह, मूल सिंह -    मोहन सिंह जूसरी के भंवर सिंह व नोरतन सिंह 
-    जगदीश सिंह जूसरी के विरेंद्र सिंह व विजेंद्र  सिंह 
-    केशव सिंह जूसरी के ईशु सिंह 
-    मूल सिंह जूसरी के शक्ति सिंह
-    भंवर सिंह राठौड जूसरी  के हर्दयांश सिंह


Wednesday, 1 April 2015

जातीय वैमनस्यता की जड़े

समाज की बहुत सारी जातियों में यह धारणा है की सिर्फ राजपूतों ने ही उनका शोषण किया है सभी का, पर ऐसा बिलकुल नहीं है !!! सभी ने खुद से नीची जाती का शोषण किया है , उदहारण के लिए जाट खुद चमार या भंगियों से छुआछूत करते थे आज भी करते हैं, यहाँ तक की चमार भी भंगी के घर से परहेज करता है और अपने आप को बड़ा मानता है !! लेकिन राजपूत कभी भी ऐसा नहीं करते थे फिर भी जब भी शोषण की बात चलती है और आकर रूकती है तो राजपूत पर ही है !  रही सही कसर राजपूत युवा खुद ही पूरी कर रहे हैं। फेसबुक व WHATSAPP पर शराब, शायरी, झटका और बन्दूको की फूहड़ता भरी तस्वीर डालकर खुद ही अपना दुस्प्रचार कर अन्य जातियों की दलील को मजबूत कर रहे है l वास्तव में क्या व्यवस्था थी उसका उदहारण निचे है l  राजपूतों को चाहिए की इंटरनेट पर हमेशा अपना पॉजिटिव सकारात्मक प्रचार करें, हमारे पूर्वज ज्ञानी और बहादुर थे न की छिछोरे, शराबी या कूल ड्यूड थे, वे फटे पुराने पहन लेते थे लेकिन अपनी जनता या प्रजा को व उनके दुखो को सर आँखों पर रखते थे l ये ज्यादा खराबा तो पिछले 300 वर्षो में अंग्रेजो के आने और उनका अनुसरण करने से हुवा है !!!

हाल में शुरू हुए बेटी बचाओ कार्यक्रम के उद्घाटन के समय अख़बार में एक खबर प्रकाशित हुयी थी, जिसमे कन्या शिशु वध रोकने के लिए राज बीकानेर से महाराजा सर गंगा सिंह जी (राजस्थान के भागीरथ) के समय जारी शाही फरमान का जिक्र था, जिसकी पहली पंक्ति थी "सभी राव-उमराव-ठाकुरों (राज बीकानेर के राजपूत प्रतिनिधि), नगर सेठ-साहूकारों-महाजनों (राज बीकानेर के वैश्य प्रतिनिधि), चौधरीयों (राज बीकानेर के जाट/बिश्नोई प्रतिनिधि) को आदेश दिया जाता है की …… हुकम की तामील करवाएं" . इस से जाहिर होता ही की उस समय भी सभी को क्षेत्र और संख्या के हिसाब से राज कार्य में प्रतिनिधित्व प्राप्त था।

पर आज के गैर राजपूत युवाओं के लिए इतिहास के ज्ञान का श्रोत या तो फिल्मे हैं या फिर उनके सामाजिक ठेकेदारों के द्वारा बताई मनगढंत कहानियां, जातिवादी वैमनस्यता का असल कारण काफी हद्द तक यह है ! क्यों की अपना स्वय का धर्म, इतिहास और संस्कृति को देखते पढ़ते नहीं और दिखने वाली को ही यथार्थ ज्ञान समझ बैठते हैं !!!  मेरा निजी अनुभव है, मैंने अपने गैर राजपूत मित्रों से जब भी पुछा की आपने कभी निजी तौर पर या अपने बुजुर्गों के निजी अनुभव से तथाकथित राजपूत अत्याचार झेला है क्या ??? तो जवाब यही मिला की नहीं, हमारे या हमारे बुजुर्गों के साथ तो कभी ऐसा कुछ नहीं हुआ पर हमने "सुना" है और सुना किससे है तो कोई जवाब नहीं और जवाब है तो पाखंडीयो का व विद्वेसता फेलाने वाली पार्टियों का !!! जाट राजपूत को ही नहीं समाज में रहने वाले हर ‪#‎धार्मिक‬ वर्ग को भी इस सबकी महती आवस्यकता है की वह इन सब पर विचार करे जिससे आपसी वैमनस्यता कम हो सके। क्यों की इन राजनितिक पार्टियो ने भी हमारे समाज में वर्ग संघर्ष के साथ साथ धार्मिक संघर्ष की जड़ो को भी खूब सींच समझ कर द्वेस्ता का एक विशाल वट खड़ा कर दिया है जो हम सबके शास्वत विचार करने और समझता पूर्ण कार्यो के करने से ही वापस गिरना संभव हो सकेगा !!! 
भंवर सिंह राठौड जूसरी

Sunday, 29 March 2015

Sunday रविवार सूर्यदिवस पर कुछ विशेष करे l


आईये हमारे हर सूर्यदिवस Sunday को कुछ रचनात्मक करते है !!! 

भारत में Sunday यानि रविवार की छुट्टी का कारण !!
 
हमारे ज्यादातर लोग Sunday की छुट्टी का दिन enjoy करने में लगाते है।

 
उन्हें लगता है, की हम इस Sunday की छुट्टी के हक़दार है।

 
क्या हमें ये बात का पता है, की Sunday के दिन हमें छुट्टी क्यों और कैसे मिली ???
और ये छुट्टी किस व्यक्ति ने हमें दिलाई ???

और इसके पीछे उस महान व्यक्ति का क्या मकसद  था ??? 
क्या है इसका इतिहास ???

साथियों, जिस व्यक्ति की वजह से हमें ये छुट्टी हासिल हुयी है, उस महापुरुष का नाम है "नारायण मेघाजी लोखंडे". (Narayan Meghaji Lokhande)

नारायण मेघाजी लोखंडे ये ज्योति राव फुलेजी के सत्यशोधक आन्दोलन के कार्यकर्ता थे और एक कामगार नेता भी थे।
अंग्रेजो के समय में हफ्ते के सातो दिन मजदूरो को काम करना पड़ता था । लेकिन नारायण मेघाजी लोखंडे जी का ये मानना था की, हफ्ते में सात दिन हम अपने परिवार के लिए काम करते है ।
लेकिन जिस समाज की बदौलत हमें नौकरिया मिली है, उस समाज की समस्या छुड़ाने के लिए हमें एक दिन छुट्टी मिलनी चाहिए।
उसके लिए उन्होंने अंग्रेजो के सामने 1881 में प्रस्ताव रखा ।

 
लेकिन अंग्रेज ये प्रस्ताव मानने के लिए तेयार नहीं थे। 

 
इसलिए आख़िरकार नारायण मेघाजी लोखंडे जी को इस Sunday की छुट्टी के लिए 1881 में आन्दोलन करना पड़ा । ये आन्दोलन दिन-ब-दिन बढ़ते गया । लगभग 8 साल ये आन्दोलन चला ।
आखिरकार 1889 में अंग्रेजो को Sunday की छुट्टी का ऐलान करना पड़ा ।

 
ये है इतिहास ।
क्या हम इसके बारे में जानते है ??? 


अनपढ़ लोग छोड़ो लेकिन क्या पढ़े लिखे लोग भी इस बात को जानते है ??? जहा तक हमारी जानकारी है, पढ़े लिखे लोग भी इस बात को नहीं जानते। 

अगर जानकारी होती तो Sunday के दिन enjoy नहीं करते....समाज का काम करते....और अगर समाज का काम ईमानदारी से करते तो समाज में भुखमरी, बेकारी, बेरोजगारी, बलात्कार, गरीबी, लाचारी, धर्म ह्वास, अपनी संस्कृति का हरण ये समस्यायें आज बिल्कुल नहीं होती !!
 
साथियों, इस Sunday की छुट्टीपर हमारा हक़ नहीं है, इस पर सबसे बड़े वार यानी "परि वार ","समाज" का हक़ है।

 
कोई बात नहीं, आज तक हमें ये मालूम नहीं था लेकिन अगर आज हमें मालूम हुआ है तो अब से ही, पहले से कर रहे है तो बहुत अच्छा है हर Sunday का ये दिन हम "mastic day" नहीं "mission day" मनायेंगे ओर विचार क्रांति फैलाएंगे ।।
निवेदक - भंवर सिंह राठौड जूसरी



 

Thursday, 5 March 2015

घर पर ही बना लेवे ईनो

घर पर ही बना लेवे ईनो ....!
लूट की भी एक हद होती है लेकिन इसमें हमारी भी कमी है हम सब की आदत हो गई है कि हम कुछ करना ही नहीं चाहते है बस बना-बनाया मिले शारीरिक कस्ट न हो जरा सी भी बुद्धि न लगानी पड़े सब कुछ स्मार्ट तरीके से हो जाए बस  !!!
 जो लोग घर में ईनो बनाने के इच्छुक है उनके लिए -
 भारत में जो ईनो की 100 ग्राम की शीशी लगभग 80-85 रुपए की मिलती है उसमें केवल 8 रुपए मूल्य की सामग्री होती है। 100 ग्राम ईनो में लगभग 45 ग्राम साइट्रिक एसिड होता है इसका मूल्य है पांच रुपए और 55 ग्राम मीठा सोडा होता है जिसका मूल्य है लगभग तीन रुपये होता है।
साइट्रिक एसिड - 100 रूपए/किलो मीठा सोडा- 60 रूपए/किलो l
घर पर ENO बनाने के लिए:-
1 निम्बू + थोडा मीठा सोडा + चुटकी नमक एक निम्बू का रस निकाले उसमें चुटकी नमक और
थोडा सा मीठा सोडा डाले और एक गिलास पानी डाल के पिए....एक दम ENO जैसा बन जाएगा l 


Tuesday, 17 February 2015

कैंसर रोग का सफलतम ईलाज



कई शोधो से पता चला है की कैंसर के मरीज की “कैंसर Cancer” से मृत्यु नही होती है, जो ईलाज उसे दिया जाता है उससे भी उसकी जल्दी मृत्यु हो जाती है । सही मायने में कैंसर से ज्यादा खतरनाक कैंसर का ईलाज ही है ।
ईलाज Treatment के बारे में आप सब जानते ही है ??? सभी को पता है कैंसर की Chemotherapy,  Radiotherapy और Cobalt-therapy के बारे में
 
क्या होता है कैंसर में - शरीर की जो रोग प्रतिरक्षात्मक शक्ति है Resistance power वो बिलकुल ख़त्म हो जाती है । जब Chemotherapy दि जाती है तो डाक्टर ये बोलते है की हम कैंसर की कोशिकाओ, सेल्स को मारना चाहते है लेकिन होता यह है की अच्छे सेल्स भी उसी के साथ मारे जाते है ।
मतलब क्या है इलाज मे जो खर्च आपने किया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हाथ से गया । डॉक्टर आपको भूल-भुलैया में रखता है की 6 महीने में ठीक हो जायेगा या 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में मरीज मारा ही जाता है, यह कभी नही हुवा की Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसी को कैंसर हो जाये तो ज्यादा खर्चा मत कीजिये क्यों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला होगा नहीं उल्टा उससे उसको इतना कष्ट होता है की आप स्वयं इसकी कल्पना भी नही कर सकते।
इस थेरेपी के लिए आप All India, PGI या Tata Institute बम्बई आदि जगह रोगी को लेकर जाते हो और जहा इंजेक्शन और दवाओ से रोगी के सारे बाल उड़ जाते है,  भोहो के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगने लगता है की  पहचान में नही आ पाता ये अपना ही आदमी है या कोई और ???  फिर इतना कष्ट क्यों दे रहे हो अपने प्रियतम को ???  सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है की आपके पास बहुत रुपया पैसा है तो कैंसर का ईलाज Treatment कराकर ही मानेंगे !!! पर क्या करे होता ही नही है ये कैंसर का ईलाज !!!
लेकिन अब अपने मरीज को लोगो के कहे अनुसार कही लेकर नहीं जाना है आपको अपने घर में ही उसकी चिकित्सा और सेवा सुश्रुसा करनी है !!
फाइनली कैंसर हो जाए तो उसके ईलाज के लिए क्या करे ???
यहाँ जो बताया जा रहा है यह बिलकुल सरल और सीधा ईलाज है कैंसर जेसे भयानक रोग का l
हमारे घर के रसोई घर में कैंसर के लिए पहले से ही एक बहुत अच्छी दवा उपलब्ध है, पहले तो डॉक्टर भी नहीं मानते थे अब तो डॉक्टरो ने भी मान लिया है इसको और वह दुनिया की एक मात्र दवा है जो Anti-Cancerous है उसका नाम है "हल्दी" । हल्दी कैंसर को पूरी तरह ठीक करने की ताकत हमेशा रखती है !
कैसे रखती है ताकत – यह जान लीजिये हल्दी में एक केमिकल होता है उसका नाम है कार्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर की कोशिकाओ को मारने में सक्षम होता है बाकी कोई केमिकल इस दुनिया में नही बना है और इसे भी आदमी ने नही स्वयं भगवान ने ही बनाया है ।
हल्दी जैसा ही कार्कुमिन और एक चीज में है वो है देशी गाय के (जिसके पीठ पर उभार थुई हो) जिसे बोलते है “गोमूत्र” में। गोमूत्र माने देशी गाय के शरीर से निकला हुआ सीधा-सीधा मूत्र जिसे आठ परत वाले सूती कपडे से छान कर लिया गया हो। इन दोनों की सहायता से कैंसर का ईलाज आप आसानी से कर पायेंगे। दवा निर्माण और सेवन विधि - अब देशी गाय का गोमूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाकर गरम करे जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेवे । इसके कमरे के तापमान में आने के बाद रोगी को चाय की तरह ही पिलाना है l चुस्किया लेते हुए सूड़प सूड़प करते हुए दिन में 2 से 3 बार तक रोगी को देवे।
एक और आयुर्वेदिक दवा है पुनर्नवा जिसका अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और भी  अच्छा परिणाम आयेगा। यह पुनर्नवा आयुर्वेद या पंसारी के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे टुकडो के रूप में मिलती है ।
इस दवा को (देशी गाय की गोमूत्र, हल्दी, पुनर्नवा) आदि को सही अनुपात में मिलाकर उबालकर ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी भी फ्रिज या, धुप में मत रखिये । ये दवा कैंसर के  दुसरे स्टेज में और कभी कभी तीसरे स्टेज में भी बहुत अच्छे परिणाम देती है
याद रखें इस दवा में सिर्फ देशी गाय का गोमूत्र ही काम में आता है विदेशी जर्सी गाय का मूत्र कुछ काम नही करता और जो देशी गाय काले रंग की हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है, इसमें एक सावधानी और भी रखनी है की गाय का गोमूत्र लेते समय वो गर्भवती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी काम में ले सकते है। जब कैंसर तीसरे स्टेज को पारकर चोथे स्टेज में पहुँच गया हो तब परिणाम मिलना कठिन हो जाता है । और इसी में भी अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy  दे दिया हो तो फिर इसका कोई असर नही आएगा !!
कितना भी खिला पिलादो कोई रिजल्ट नही आएगा, रोगी को मरना ही पड़ता है । आप अगर किसी रोगी को ये दवा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy शुरू तो नही की हुई है ??? अगर शुरू  है तो आप उसमे हाथ मत डालिए, जैसा डॉक्टर कहता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए इतना ही करे ।
और अगर Chemotherapy शुरू नही हुई है और उसने कोई एलोपेथी treatment भी शुरू नही किया तो आप देखेंगे इसके चमत्कारिक  परिणाम आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के Resistance पर, जो हमारी Vitality है उसको improve करती  है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शरीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।
ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही नही तो और भी अच्छा है यह जानना। तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के,  हमेशा जान ले की आप जो खाना खा रहे है उसमे डालडा घी (Refine oil ) तो नही है ?  उसमे refined oil तो नही है ? हमेशा शुद्ध तेल खाये अर्थात सरसों, नारियल, मूँगफली का तेल खाने मे प्रयोग करें ! और घी अगर खाना है तो देशी गाय का घी खाएं ! गाय का देशी घी नहीं खाये  !
ये देख लीजिये आप जो भी दूसरा खाना खा रहे है उसमे रेशेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिलके  वाली दाले, छिलके वाली सब्जिया, चावल भी छिलके वाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।
और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तीन कारण है, एक तो है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी, सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हाथ मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारण हो रहे है हर देश में । कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाव ही इसका उपचार उपाय है ।
आजकल महिलाओं को भी बहुत कैंसर हो रहा है उनके uterus में, गर्भाशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से भी बढ रहा है l पहले गाठ Tumour होती है फिर कैंसर में convert  हो जाता है । तो माताओं, बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी गाठ  Tumour  न हो ?? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शरीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हालाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है l
लेकिन आपको सावधान होना तो ही पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी  हो जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अच्छा उपाय है "चुना" । चुना वही जो पान के लगाया और खाया जाता है, जो पुताई में इस्तेमाल होता है, पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये,  इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये,  दही में घोल के दही पी लीजिये,  लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, दाल में मिलाकर दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना वर्जित है ।
पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए आभार !!!
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साभार - भंवर सिंह जूसरी